क्यों

मैं क्यों यहाँ पर हूँ? मैं कौन हूँ? मेरे मरने के बाद क्या होगा?


इन प्रश्नों ने युगों से लोगों को उत्सुक किया है और इन्हें परमेश्वर के पुत्र, यीशु मसीह को जानने के द्वारा उसकी उद्धार की योजना को समझने के द्वारा खोजा जा सकता है।


यीशु कौन है और उसने क्या किया है?


यीशु मसीह, परमेश्वर का पुत्र, एक मानवीय प्राणी होकर संसार में आया, एक पापरहित जीवन को व्यतीत किया, क्रूस पर मर गया, और मनुष्यों को उनके पापों में मरने से बचाने के लिए मुर्दों में से जी उठा।


मसीह हमारे पापों का भुगतान करने के लिए मर गया; आपके पाप माफ हो सकते है। और क्योंकि उसने पाप पर विजय पायी, आप निश्चित हो सकते है कि आपके मरने के बाद क्या होगा-आप अनन्त जीवन पाएँगे!


यह अन्नत जीवन का उपहार आपको प्रेम के साथ दिया गया है, और आपको केवल यह करना हैः

• माफी माँगे

• उद्धार के उपहार में विश्वास करें

• आपके पापों का अंगीकार और प्रार्थना करे

• यीशु को अपने जीवन में ग्रहण करें

माँगना

प्रकाशितवाक्य 3:20 में, यीशु कहता है, "देख, मै द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ।"


इसका क्या अर्थ है? यीशु आपके साथ एक व्यक्तिगत संबंध को चाहता है! वह आपका इंतज़ार कर रहा है कि आप उसे अपने हृदय में और आपके जीवन में उसको ग्रहण करें। आपको केवल यह करना है कि उसके अन्दर आने का निमंत्रण देना है!


पहला कदम माफी माँगना हैः


"मन फिराओ. . .कि तुम्हारे पाप मिटाए जाएँ, जिस से प्रभु के सम्मुख विश्रान्ति के दिन आएँ" - प्रेरितों के काम 3:19

विश्वास

एक बार जब आपने माफी माँग ली, आपका अगला कदम विश्वास करना और आपके अन्दर परमेश्वर के उपहार पर विश्वास करना है। यह समझें कि माफी और अनन्त जीवन का उपहार मुफ्त में है!


क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है; और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है। - इफिसियों 2:8-9


अनुग्रह आपके द्वारा कार्य करती परमेश्वर की सामर्थ्य है; आपको इस उपहार के लिए कार्य नहीं करना है। आपको केवल आपके पूरे दिल के साथ विश्वास करना है कि मसीह आपको बचाने के लिए मर गया था।

प्रार्थना

बाईबल वायदा करती है कि जब आप गंभीरता से माफी को माँगते है, आप यीशु में एक संपूर्ण नए जीवन का अनुभव करेंगे!


कि यदि तू अपने मुँह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे, और अपने मन से विश्वास करें, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा। - रोमियों 10:9


"पिता, मैं जानता हूँ कि मैंने आपके विरूद्ध पाप किया है। कृपया मुझे माफ करें। मुझे धो कर साफ कर दें। मैं यीशु, आपके पुत्र में भरोसा करने का वायदा करता हूँ। मैं विश्वास करता हूँ कि वह मेरे लिए मर गया-उसने मेरे पापों को स्वयं पर ले लिया जब वह क्रूस पर मरा था। मैं विश्वास करता हूँ कि वह मुर्दो में से जी उठा। मैं आज यीशु को अपना जीवन समर्पित करता हूँ। पिता माफी और अनन्त जीवन के आपके उपहार के लिए आपका धन्यवाद। आप के लिए जीवन व्यतीत करने में कृपया मेरी सहायता करें। यीशु के नाम में, आमीन।"


परमेश्वर के आगे प्रार्थना करते हुए, यह आपके दिल का व्यवहार है जो महत्वपूर्ण है!

ग्रहण करें

आपका अंतिम कदम माफी और अनन्त जीवन के इस मुफ्त के उपहार को स्वीकार करना है। बाईबल सिखाती हैः


परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात् उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते है। - यूहन्ना 1:12


जब आप यीशु को अपने दिल में ग्रहण करते है, आप परमेश्वर की एक संतान बन जाते है, और आपके पास किसी भी समय, और कुछ भी के लिए प्रार्थना में उससे बात करने का लाभ होता है!


सबसे उत्तम, यह एक सबंधं है जो अनन्त काल तक रहता है।


आनन्द के साथ इसको ग्रहण करें!

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