आशा के हाथ भारत भर में मानव कल्याण संबंधी लोगों की आवश्यकतों की सेवा के लिए या उनके दुःखों को मिटाने के लिए उन तक पहुँचता है।


यह आशा के हाथ की परियोजनाएं है जो देश भर में आवश्यकता में लोगों की सहायता करती हैः

  • फीडिंग प्रोग्राम

      आज संसार में भूख और कुपोषण बच्चों के बीच मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। पौष्टिक भोजन के बिना एक बच्चे का शरीर धीरे-धीरे कमज़ोर होता है और वह कभी-कभी गंभीर या कई बार विनाशक कमियों को सहन करता या करती है।

      प्रत्येक बच्चा जो आशा के हाथ फीडिंग कार्यक्रम में नामांकन किया गया है उनके पौष्टिक भोजन खिलाया जाता, स्कूल के कार्य में सिखाया जाता, और अन्य बच्चों के साथ पर्याप्त खेलने का समय दिया जाता है। संक्षेप में, फीडिंग कार्यक्रम बहुत से बच्चों को वह देता जो उनके पास नहीं है-एक खुश और पूर्ण बचपन!

  • चिल्ड्रन होम

      एक माता-पिता या संरक्षक के बिना, एक बच्चा आम तौर पर गलियों में एक बिना निगरानी के संसार में भटकता भयानक ख़तरों में पड़ जाता है। शोषण, बाल मजदूरी, मानव व्यापार-यह केवल कुछ ख़तरे है जिनमें बच्चा उचित अगुवाई और देखरेख के बिना पड़ सकता है।

      आशा के हाथ चिल्ड्रन होम इन बच्चों को एक सुरक्षित वातावरण में रखता है, पौष्टिक भोजन देता, उनकी उम्र के अन्य बच्चों के साथ अच्छे और मनोरंजक सपंर्क को देता, और उन्हें एक मज़बूत नींव को देता है जिसमें वह सफल युवा वयस्कों होकर बढ़ते है।

  • वाटर रिलीफ

      पीने का पानी की कमी एक महामारी है जो संसार के बहुत से हिस्सों में फैल रही है। पानी पीने के बिना, मानव शरीर गंभीर रूप से निर्जल हो सकता है-एक स्थिति जो बीमारी और मृत्यु में अगुवाई करती है।

      आशा के हाथ पानी की कमी का हल ढूँढने के लिए एक परियोजना को चलाता है जिसे वेल् आफ् लाईफ् कहा जाता है। वेल् आफ् लाईफ् टीम एक क्षेत्र को पहचानती है जो पीने का पानी की कमी से पीड़ित है और पीने का पानी की बेहद आवश्यकता में एक गाँव या शहर के लोगों के लिए एक नए कुँए या नल को वहाँ खोदता है।

  • मेडिकल मिशन

      कम मेडिकल इलाज या बिल्कुल भी ना इलाज होना एक मानवीय प्राणी के जीवन में एक बड़े ख़तरे को पैदा करता है। लोग जो मेडिकल इलाज नहीं करवा सकते या ऐसे क्षेत्र में रहते जहाँ पड़ोस में कोई अस्पताल नहीं है, पीड़ा में होते है या यहाँ तक कि निवारण करने योग्य बीमारी से मर भी जाते है।

      आशा के हाथ डाक्टरो का टीम, दाँतों के डाक्टर, नेत्र रोग विशेषज्ञ, फार्मसिस्ट, लैब टकनीशियन और स्वयंसेवक बीमारी का पता लगाने, और जिन लोगों के पास मेडिकल सहायता नहीं, को निदान करने के लिए पिछड़े क्षेत्रों में यात्रा करते है। बहुत से लोगों के लिए, यही एक मेडिकल सहायता है, जो उन्होंने उनकी बीमारी के लिए प्राप्त किया।

  • मानव व्यापार

      मानव व्यापार सचमुच हमारे संसार के घिनौने अपराधों में से एक है। लड़कियाँ और स्त्रियाँ जिनका अपहरण कर लिया जाता है, और वेश्यागमन के लिए मजबूर किया जाता, टूटे जीवनों को व्यतीत करती है जो ज्यादातर लोगो के लिए समझना मुश्किल है।

      आशा के हाथ पहले इन लड़कियों और स्त्रियों को छुड़ाता है, तब एक सुरक्षित और सेहतमंद वातावरण में उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने में सहायता करता है। संस्था एक मित्रता के वातावरण में जहाँ पर स्त्रियाँ नए मित्र बना सकती है, व्यवसाय कुशलता सिखाने के लिए कक्षाएँ चलाती है।

      आशा के हाथ उनके बच्चों की देखरेख, एक शिक्षा को प्रदान करने और एक मनोरंजक वातावरण देने के द्वारा, जिसमें वह फलदायक युवा वयस्क बनकर बढ़ सकते है।

  • लेपरसी केयर

      भारत में, यहाँ पर कुष्ठ रोगियों की बेहद गिनती है-संसार में सबसे ज्यादा। प्रत्येक साल, लोगों को कुष्ठ रोग हो जाता है, एक पुरानी और संक्रामक बीमारी जो कि चमड़ी, नसों, हाथ-पांव, आँखों और शरीर के अन्य भागों को प्रभावित करती है। इलाज के बिना, कुष्ठ गंभीरता से लोगों को कुरूप बनाता और अयोग्य करता है, इसके अतिरिक्त हानियों की एक लम्बी सूची है जो उनके जीवन को अपाहिज बना सकती है।

      आशा के हाथ ने ऐम्बरेस ए विलेज के साथ, छः परियोजानाओं द्वारा, भारत में कुष्ट से पीड़ित लोगों की सेवा करने के लिए भागेदारी की है।

    • • दि शू प्रोजेक्ट माइक्रो सेलुलार रबर (डब्त्) के साथ बने विकलांगो के उनके आकार के जूते कुष्ठ कालोनियों में रहते लोगों को बाँटता है।
    • • दि डे केयर सेंटर कुष्ठ प्रभावित बच्चों के लिए जब उनके माता-पिता जीविका कमाने के लिए जाते तो उन्हें एक सुरक्षित वातावरण देता है।
    • • दि इवनिंग स्कूल कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों के बच्चों को उनके स्कूल के काम में सहायता करता है क्योंकि उनके माता-पिता ज्यादातर अनपढ़ है और सहायता करने में अयोग्य है।
    • • दि राईस डिस्ट्रिब्यूशन प्रोजेक्ट 5 से 10 किलो के चावल के थैलें कुष्ठ कालोनियों में रहते लोगों को बाँटते है।
    • • दि मेडिकल प्रोजेक्ट स्वयं-देखरेख पैकेट को बाँटते है जिसमें माप पैमाना, पट्टियों का कपड़ा, कॉटन पैड, एंटीसेप्टिक, क्रीम/लोशन और मरहम चमड़ी के इलाज के लिए होता है।
    • • धर्मशाला बुढ़े कुष्ठ प्रभावित लोगों को मेडिकल और व्यक्तिगत देखरेख के (साथ ही घर को) प्रदान करती है जिनकी देखरेख के लिए उनका कोई मित्र या परिवारिक सदस्य नहीं होता है।
  • विपत्ति राहत

      जब प्राकृतिक अनकही तबाही विपदा का कारण बनती, विपदा कि शिकार लोगो को आपतकाल पूर्ति बाँटने और उन लोगों का, जिनका विनाश ने उनके घरों और जीवनों को तबाह कर दिया के पास थोड़ी या बिल्कुल सहायता नहीं है, आशा के हाथ सहायता देने के लिए दूर-दूर तक यात्रा करता है।

      आशा के हाथ ने निम्नलिखित विपदाओं में मानव-कल्याण के कार्य में सहायता की हैः

    • • भारतीय समुन्दर में सुनामी (2004)
    • • कर्नूल बाढ़ (2009)
    • • मेयनमार भूकम्प (2011)
    • • थाईलैंड बाढ़ (2011)
    • • नेपाल भूकम्प (2015)
    • • तामिलनाडू बाढ़ (2015)
    • आशा के हाथ जॉयस मेयर मिनिस्ट्रीज़ की एक मिशन शाखा है। हमारा लक्ष्य साधारण मानवयी दुखों को मिटाने में, जितना सम्भव हम कर सकते, ज्यादा से ज्यादा दुखी लोगों की सहायता करना और मसीहियों की उनके विश्वास में वृद्धि करने में सहायता करना है।

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