एक झोपड़ पट्टी में लोग घरेलु नौकर या फैक्टरी में कार्य करते रोजी रोटी कमाने के लिए संद्यर्ष करते है।


इन जीवन व्यतीत करने में संद्यर्ष करते लोगों क बीच एक परिवार एक विशेष आवश्यक्ता में था।


परिवार में पिता जी उनकी पत्नी को मानसिक बीमारी में पीछे छोड़ते चल बसे थे। दो छोटी बेटियाँ-कोमल और रानी-उनके सभी जानने वालों से अलग थी वह स्वयं देखभाल करने के लिए छोड़ी जा चुकी थी और क्योंकि कोई उनकी सहायता के लिए नहीं था इसलिए अनाथों जैसा बर्ताव की जाती थी।


कोमल और रानी अनाथ जान कर सहायता का हाथ चिल्ड्रन होम में आई थी पर समय निकलने पर एक बड़े और प्रेमी परिवार की सदस्य बन गई।


नौ साल की कोमल ने अपने जीवन के हर क्षेत्र में सुधार किया है। सेहतमंद और अच्छी तरह से पोषण की गई वह ऊर्जा से भरी हुई है और अपनी पंसदीदा खेलों में हिस्सा लेती है जिसके लिए वह ईनाम भी जीतती है।


कोमल यीशु के बारे बिल्कुल नहीं जानती थी। पर होम में वह बाईबल कहानियां पढ़ती है और अन्य बच्चों को यीशु के बारे बातें करती सुनती है।


अब वह संडे स्कुल के गीत गाती और अन्य बच्चों के साथ प्रार्थना करती है।


सहायता का हाथ कोमल और रानी के लिए एक उज्जवल भविष्य के लिए तैयारी का अवसर है। एक साथ लडकियां एक ऐसे वातावरण में पालन-पोषण की जाती जहां पर उनकी सभी आवश्यक्ताएं पूरा की जाती और उन्हें उनका अपना भविष्य उत्पन्न करने का अवसर दिया जाता है।


*नाम गोपनीयता के लिए बदल दिए गए है।

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