प्रणय का गाँव एक किताब में से छोटे से ग्रामीण क्षेत्र से भिन्न, भूरा और खराब है


यह लोगों को कोई रसद नहीं देता जो गर्म मौसम और कठिन आर्थिक स्थितियों के साथ रह नहीं पाते है।


7 साल का प्रणय और उसका परिवार इसे अच्छी तरह से समझता है और मुश्किल से गुजारा करने के लिए प्रतिदिन लड़ता है।


परिवार की रोजी-रोटी के लिए धन पर निर्भर रहते माता-पिता प्रतिदिन खेतों में कठिन परिश्रम करते है। प्रणय और उसकी बहन को स्कुल की सुविधा को छोड़ना पड़ा।


इसी समय के दौरान उसके माता-पिता का हैदराबाद में सहायता का हाथ फीडिंग कार्यक्रम के बारे में पता लगा। उन्होंने उसका नाम दर्ज कराने में जरा भी देरी नहीं की और उसे बदलता देख आनन्द से भर गए थे।


आज प्रणय एक बहुत भिन्न जीवन व्यतीत करता है। वह सेहतमंद भोजन को खाता अपनी पढ़ाई उत्सुकता से करता और अच्छा बर्ताव करने वाला प्रस्न्न बालक है। एक वह बालक जिसे उसके भविष्य की आशा मिल गई है।


* गोपनीयता के कारण नाम बदला गया है।

Copyright © 2016 | Contact Us